Bihar Cricket Association

 

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बीसीए सचिव का अध्यक्ष के नाम जवाबी पत्र........
संदर्भ : बीसीए सचिव के द्वारा 30 मार्च को अध्यक्ष को दिए गए पत्र के जवाब में 3 अप्रैल को अध्यक्ष महोदय के द्वारा दिए गए जवाबी पत्र में वर्णित विंदूओ पर अध्यक्ष महोदय को प्रेषित पत्र। संक्षिप्त:सचिव ने 31 जनवरी 2020 को अध्यक्ष के द्वारा आहुत वार्षिक आम सभा, हाल ही में अध्यक्ष महोदय के द्वारा घोषित कमेटी आदि की वैधानिकता सहित अन्य विंदूओ पर संविधान के अनुसार स्थिति स्पष्ट करने का आग्रह किया। विस्तृत पत्र:...... सेवा में, अध्यक्ष महोदय बिहार क्रिकेट एसोसिएशन विषय: असंवैधानिक तरीके से कमेटी का गठन करने के संबंध में। संदर्भ: आपसे प्राप्त ईमेल दिनांक 04/05/2020 के सम्बन्ध में। महोदय, आपको याद होगा कि 2 अक्तूबर 2019 को आहुत नव निर्वाचित कमेटी ऑफ़ मैनेजमेंट की बैठक में मैंने उपस्थित सभी सम्मानित सदस्यों को बीसीए के संविधान की एक एक प्रति दी थी। आपसे आग्रह है कि एक बार संविधान का अध्ययन करें या फिर किसी जानकार व्यक्ति से संविधान में वर्णित विंदूओ को समझने की कोशिश करें। क्योंकि या तो आपको संविधान की समझ नहीं है, या आप संविधान का उल्लंघन करने को प्रतिबद्ध होकर संविधान को समझना नहीं चाहते हैं। महोदय आपके द्वारा भेजे गए पत्र में आम सभा (General Body) का उल्लेख किया जाता है। इस संबंध में आपकी जानकारी के लिए सूचित करूँ कि सुप्रीम कोर्ट से अनुमोदित बीसीए संविधान में आम सभा के स्वरूप को स्पष्ट किया जा चुका है, जो निम्न है: 1. यह कि बीसीए के संविधान के अनुसार आम सभा की बैठक के चार स्वरूप हैं। पहला आम सभा - धारा 11(1) के अनुसार आहुत होने वाला वार्षिक आम सभा (यह प्रति वर्ष एक बार 30 अगस्त से पहले आयोजित किया जाता है), दूसरा आम सभा - धारा 11(2) के अनुसार आहुत होने वाला आम सभा (यह तीन वर्ष में एक बार चुनाव के लिए आयोजित किया जाता है), 2. उप्रोक्त दोनों आम सभाओं के लिए संविधान में एजेंडा निर्धारित है। 3. तीसरा आम सभा - जरूरत विशेष पर संविधान की धारा 12 के अनुसार विशेष आम सभा तय एजेंडा पर आहुत करने का प्रावधान है। 4. चौथा आम सभा - जो संविधान की पृष्ठ संख्या 4 (Memorandum of Association) पर अंकित कंडिका 4 के अनुसार आम सभा बिहार क्रिकेट संघ को विघटित करने हेतु आहुत किया जा सकता है। अतः आप मुझे यह समझाने का कष्ट करें कि आप जिस वार्षिक आम सभा की बैठक दिनांक 31.01.2020 का जिक्र कर रहे हैं, वो बिहार क्रिकेट संघ के संविधान की किस धारा के तहत आहुत किया गया था और यदि वह वार्षिक आम सभा बिहार क्रिकेट संघ के संविधान के किसी भी सुसंगत धारा के तहत नहीं बुलाई गयी तो उस वार्षिक आम सभा का कानूनी वैधता क्या होगा | आपको यह भी सूचित करू कि आप जिस आम सभा की बैठक का उल्लेख कर रहे हैं, वह उपस्थित सदस्यों और मुझे भी गुमराह करके संविधान के विरुद्ध जाकर आयोजित किया गया था। आपने उस बैठक का जो कार्यवृति मुझे भेजा है, और उसमें जिन सम्मानित सदस्य के आरोप पर मेरे कार्य करने पर रोक लगाने की बात कही गई है, वह पूर्णतः गलत है। जिसकी सूचना उक्त सदस्य के द्वारा आपको दी जा चुकी है। इससे यह प्रमाणित होता है कि आप उक्त असंवैधानिक बैठक के कार्यवृति में बदलाव करने का काम किया है। वैसे आपके द्वारा पहले भी कार्यकारणी की बैठक दिनांक 15.11.2020 के कार्यवृति में बदलाव किया जा चुका है। जहां तक किसी भी पदाधिकारी, अधिकारी या फिर खिलाड़ी के उपर कारवाई करने के लिए बीसीए संविधान में स्पष्ट किया गया है, लेकिन उसके लिए आपको संविधान के अनुसार चलने की कृपा करनी होगी। आपने अपने ईमेल दिनांक 04.05.2020 में मेरे ऊपर यह आरोप लगाया है कि मैंने CEO एवं चेयरमैन, पांच सदस्ये जाँच समिति के द्वारा मांगे गये कागजातों को नहीं दिया | इस सम्बन्ध में आपको बतादूँ कि मैंने उन दोनों पदाधिकार्यों के सारे ईमेल का जबाब निश्चित तौर पर दिया हूँ लेकिन उन दोनों पदाधिकारियों ने मेरे किसी भी ईमेल की प्रतिक्रिया नहीं दिया, इसलिए आपके द्वारा लगाया यह आरोप निराधार है | सुलभ प्रसंग हेतु आपको सूचित करूँ कि आप सभी के द्वारा किसी भी निश्चित कागजातों, जो मेरे पास उपलब्ध हो, की मांग नहीं की गयी है जबकि बिहार क्रिकेट संघ की सभी कागजात बिहार क्रिकेट संघ के दफ्तर में उपलब्ध होना चाहिए और यदि कोई कागजात अनुपलब्ध है तो निश्चित ही स्वघोषित कार्यवाहक सचिव या बिहार क्रिकेट संघ के कर्मचारियों के पास उपलब्ध होना चाहिए क्योंकि तथाकथित वार्षिक आम सभा दिनांक 31.01.2020 में मेरे विरुद्ध लिए गये गैरकानूनी निर्णय का विरोध करता रहा हूँ अतः आज तक मैंने अपना कार्यभार स्वघोशित कार्यवाहक सचिव नहीं दिया है और वे अपना कार्य कर रहे हैं, वह भी नये दफ्तर से जहाँ बिहार क्रिकेट संघ के सारे कर्मचारियों कार्य कर रहे हैं और बिहार क्रिकेट संघ के बैंक खाता से लगभग 80-90 लाख रूपये खर्च भी किये गये हैं | अब सवाल यह उठता है कि यदि सक्षम न्यायालय के द्वारा तथाकथित वार्षिक आम सभा दिनांक 31.01.2020 में मेरे विरुद्ध लिये गये निर्णय को ख़ारिज कर दिया जाता है, जिसकी सम्भावना प्रवल है, तो जो 80-90 लाख रूपये खर्च किये गये है उसकी भरपाई कौन करेगा | वैसे भी, CEO के द्वारा मेरे कार्य पर रोक संबंधी मामले को माननीय लोकपाल महोदया के समक्ष उठाया है जो की माननीय लोकपाल महोदया के आदेश दिनांक 06.03.2020 के आदेश के अनुच्छेद 02 से विदित होता है जो निम्न प्रकार से है : “That the petitioner has sought direction for restraining the respondent Sri Sanjay Kumar, the Honorary Secretary of B.C.A. from discharging his duties as Honorary Secretary of the B.C.A. w.e.f. 31.01.2020 as per the decision of the General Body Meeting of the B.C.A. ......” अतः एक ही आरोप के लिए मेरे ऊपर दो कार्यवाही नहीं चलाई जा सकती है, एक उस जाँच समिति के द्वारा जिसका गठन ही गैर कानूनी है और दूसरा माननीय लोकपाल महोदया के द्वारा. इतना ही नहीं, आपके द्वारा आज तक निर्गत सारे के सारे पत्र, अधिसूचना, आदेश बिहार क्रिकेट संघ के संविधान के विरुद्ध है जिसका जिक्र मेरे द्वारा आपको भेजे गये दो ईमेल दिनांक 01.03.2020 एवं 26.02.2020 (प्रसंग हेतु दोनों ईमेल संलग्नक) में किया गया है जिसकी प्रतिक्रिया आज तक प्राप्त नहीं हुई है जिसका कानूनी मतलब है कि आप उक्त दोनों ईमेल में उठाये गये सवालों को स्वीकार करते हैं | यदि तथाकथित वार्षिक आम सभा दिनांक 31.01.2020 में मेरे विरुद्ध लिए गये निर्णय को, तर्क के लिए, मान भी लूँ तो क्या आप मुझे यह समझाने का कष्ट करेंगे कि:- 1. बिहार क्रिकेट संघ के संविधान की किस धारा में आम सभा को यह शक्ति दी गयी है कि आम सभा कार्यकारणी के किसी सदस्य के कार्य पर रोक संबंधी निर्णय ले सकती है या उन्हें पदमुक्त कर सकती है | 2. बिहार क्रिकेट संघ के संविधान की किस धारा के अंतर्गत एक वित्तीय वर्ष में दो वार्षिक आम सभा (चुनावी वार्षिक आम सभा को छोर कर) की बैठक बुलाई जा सकती है | 3. क्या आज के तारीख में बिहार क्रिकेट संघ के सचिव का पद रिक्त हो गया है, यदि नहीं तो कार्यवाहक सचिव की नियुक्ति बिहार क्रिकेट संघ के संविधान की किस धारा के अंतर्गत हुई है | 4. जब माननीय लोकपाल की नियुक्ति की वैधता उप न्यायाधीन है तो उनको मासिक भुगतान किस आधार पर की गयी और यदि माननीय उच्च न्यायालय के द्वारा उनकी नियुक्ति को गैर कानूनी घोषित करती है तो उनको की गयी 09 लाख रुपये की भरपाई किनसे की जाएगी | 5. आपके पत्रांक दिनांक 27.04.2020 के द्वारा कई समितियों को गठित की गयी है, इस संबंध में क्या आप यह बताने का कष्ट करेंगे कि: (अ) बिहार क्रिकेट संघ के संविधान की किस धारा के अंतर्गत बिहार क्रिकेट संघ के द्वारा निर्गत की जाने वाली पत्र, अधिसूचना, आदेश वगेरह बिहार क्रिकेट संघ के अध्यक्ष के हस्ताक्षर से निर्गत होगा | (आ) बिहार क्रिकेट संघ के संविधान की किस धारा के अंतर्गत आंचलिक समितियों का गठन की गयी है क्योकि बिहार क्रिकेट संघ के संविधान में सिर्फ दो तरह की समितियों के गठन का प्राबधान है – एक स्थाई समितियाँ एवं क्रिकेट समितियाँ | फिर ये आंचलिक समितियाँ, मीडिया समिति एवं लीगल समिति का गठन, क्या कानूनन सही है | (इ) एक तरफ लीगल समिति का गठन और दुसरे तरफ लीगल सर्विस प्रोवाइडर की नियुक्ति का क्या औचित है | (ई) बिहार क्रिकेट संघ के संविधान में सिर्फ पांच आंचलिक का प्राबधान है तो फिर ये आठ आंचलिक बिहार क्रिकेट संघ के संविधान की किस धारा के अंतर्गत गठित की गयी है | (उ) तर्क के लिए यह मान भी लिया जाये की आंचलिक समितियों का गठन कानूनन सही है (जो कि नहीं है) तो आपके द्वारा हस्ताक्षरीत अधिसूचना के अवलोकन से यह विदित होता है कि ये समितियाँ टूर्नामेंट समिति के अधीन गठित की गयी है और टूर्नामेंट समिति का नामोनिशान नहीं है और उधर एक ईमेल GM-Cricket Operation के नाम से संचालित है | कृपया करके इस भेद को भी खोलने का कष्ट करें | दूसरा, यदि यह आंचलिक समितियाँ टूर्नामेंट समिति के अधीन गठित की गयी है तो इन समितियों को क्रिकेट समितियों के श्रेणी में ही हो सकता है और तब बिहार क्रिकेट संघ के संविधान के अंतर्गत क्रिकेट समितियों के अंतर्गत गठित सभी उप-समितियों का गठन सिर्फ और सिर्फ पूर्व खिलाडियों के द्वारा ही की जा सकती है | 6. साथ ही साथ मेरे ईमेल दिनांक 01.03.2020 एवं 26.02.2020 में उठाये गये बिन्दिओं पर भी यदि आपकी प्रत्रिक्रिया मिल जाता तो आपकी बड़ी कृपा होगी | अन्त में आपसे अनुरोध है कि संविधान का उल्लंघन करना बंद कीजिए, ताकि बिहार क्रिकेट और बिहार के खिलाड़ियों के साथ न्याय हो सके। धन्यवाद संजय कुमार सचिव बिहार क्रिकेट एसोसिएशन पूर्व में सचिव के द्वारा अध्यक्ष महोदय को भेजे गए पत्र को पढने के लिए डाउनलोड करें .....

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Posted on : ( 06-05-2020 )